बैंक लोन के फायदे, नुकसान और इसके प्रकार

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Last Updated on September 20, 2021 by WikiHindi

जब कभी किसी इंसान के साथ वित्तीय समस्या आती है तब उसकी पहली और आखिरी उम्मीद बैंक लोन होती है। अभी के समय में लोग केवल किसी वित्तीय समस्या के कारण ही बैंक लोन नहीं लेते बल्कि अपनी कुछ जरूरतों को भी पूरी करने के लिए बैंक लोकन लेते है। जैसे कार के लिए लोन, घर अथवा फ्लैट के लिए लोन, शिक्षा लोन इत्यादि।

इस लेख के जरिये आप बैंक लोन क्या है? से लेकर इसके फायदे और नुकसान के बारे में पढ़ेंगे। अगर आप किसी भी प्रकार के बैंक लोन लेने का मन बना रहे हो तब यह लेख आपको फैसले लेने में काफी हद्द तक मदद करेगी।

बैंक लोन क्या है?

जब कोई इंसान अपनी कुछ वित्तीय जरूरतों या किसी अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए वित्तीय मदद की आवश्यकता होती है तब बैंक से ब्याज पर मिलने वाली ऋण ही बैंक लोन कहलाती है। किसी भी प्रकार के लोन के दो रूप होते हैं पहले मूलधन और दूसरा ब्याज।

मूलधन वह रकम होती है जिसे आप ऋण के रूप में अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए लेते हैं और वहीं मूलधन पर लगने वाली अतिरिक्त शुल्क जो आप अपने बैंक को चुकाते हैं उसे ब्याज कहते हैं।

बैंक लोन के फायदे, नुकसान और इसके प्रकार
बैंक लोन के फायदे, नुकसान और इसके प्रकार

बैंक लोन के प्रकार

आमतौर पर बैंक लोन को दो भागों में विभाजित किया जाता है:

  1. सुरक्षित ऋण (Secured Loan): वैसा बैंक लोन जिसमे ऋण के बदले ग्राहक अपनी कुछ संपत्ति को सुरक्षा जमा के रूप में पेश किया जाता है वह सुरक्षित ऋण कहलाता है। ऐसे लोन आमतौर पर लम्बी समय अवधी के लिए दिय जाता है। ऋण की अदायगी नहीं करने के स्तिथि में वित्तीय संस्थानों को दिए गए संपत्ति को जब्त करने का अधिकार होता है।
  2. असुरक्षित ऋण (Unsecured Loan): वैसा बैंक लोन जिसमे ऋण के बदले ग्राहक अपने किसी संपत्ति को सुरक्षा जमा के रूप में पेश करना नहीं पड़ता वह असुरक्षित ऋण कहलाता है। ऐसे ऋण आमतौर पर कम समय अवधी के लिए जारी किया जाता है।
  • व्यक्तिगत ऋण (Personal Loan)
  • शिक्षा ऋण (Education Loan)
  • बंधक ऋण (Mortgage Loan)
  • गृह ऋण (Home Loan)
  • कार ऋण (Car Loan)
  • दोपहिया ऋण (Two-Wheeler Loan)

बैंक लोन के फायदे

नकदी नहीं होने पर भी मिलते हैं पैसे

बैंक लोन की सबसे बड़ी खासियत या कहें फायदे यही हैं की नगदी न होने की स्तिथि में भी बैंक या वित्तीय संस्थान लोन जारी करती है। जिसका उपयोग लोग अपनी किसी तरह की जरूरत को पूरा करने में करते हैं। आमतौर पर बैंक से ऋण लेना उनके लिए फायदेमंद होता है जो अपनी नयी बिज़नेस की शुरुआत करना चाहते हैं।

विकास का चालक

बैंक लोन किसी भी देश के साथ साथ वहाँ की कंपनियों के लिए विकास का एक प्रमुख चालाक माना जाता है। देश में ऐसी कम ही कंपनियां होती है जिनके पास पूर्ण रूप से नगदी मौजूद रहता हो। ऐसे हालत में भी बैंक ही एक ऐसा कंपनियों का सुचारु रूप से कार्य करने के लिए लोन के रूप में पैसे देकर चालू अवस्था में रखती है।

उचित ब्याज दर

आमतौर पर बैंकों द्वारा किसी भी पतरह के लोन पर लिया जाने वाला ब्याज दर काफी कम होता है। यह सालाना 6% से 11% के बिच में ही होता है। जो की किसी भी साहूकार द्वारा लिए जाने वाले ब्याज से काफी कम होता है।

सुरक्षित

चूँकि बैंकिंग प्रणाली और व्यवस्था पूरी तरह से सरकार के देख-रेख में कार्य करती है इसी वजह से जालसाजी, ठगी और शोषण जैसी समस्या से ग्राहक बचे रहते हैं और बैंकों से लोन या क़र्ज़ लेने में हिचकिचाते नहीं हैं। बैंक लोन से जुडी हर एक प्रक्रिया और इसमें लगने वाले कागजात की सही ढंग से जांच की जति है और तब जाकर लोन आवंटित की जाती है।

फ्लेक्सिबिलिटी

बैंक से लाओं लेने पर बैंक अपने ग्राहकों को इसे वापस चुकाने के लिए कुछ समय निर्धारित करवाती है और उसी समय अंतराल में बैंक अपने द्वारा दिए गए लोन या ऋण को प्रति महीने EMI के रूप में वापस वसूलती है। जो की अपने आप में ग्राहक को काफी बड़ी सहूलियत देता है। यह समय 6 महीने से लेकर 10 या उससे अधिक साल तक का भी हो सकता है।

कर लाभ (Tax Benefit)

उधारकर्ता को सबसे बड़ा लाभ तो टैक्स में छूट से मिलता है। बैंक के लोन पर दी जाने वाली ब्याज आपके आय पर लगने वाली टैक्स से छूट दिलाने में आपकी मदद भी करता है। छोटे उधारकर्ताओं के लिए शायद यह रकम उतने मायने नहीं रखते हों लेकिन बड़े उधारकर्ताओं के लिए कर में छूट मिलने पर रकम में भारी अन्तर देखा जाता है और उनके लिए यह रकम लाख से लेकर करोड़ों तक भी हो सकती है।

बैंक लोन के नुकसान या कमियां

अतिरिक्त पैसों का भुगतान

बैंक से लोन लेने की सबसे बड़ी कमी यही है की उधारकर्ता को किसी भी वस्तु की कीमत उसकी असल कीमत से ज़्यादा चुकानी पड़ती है। उद्धरण के तौर आप इसे ऐसे समझे की किसी घड़ी की कीमत 1000 रूपए है और आपके पास 400 रूपए पहले से मौजूद हैं और बाकी के 600 रूपए आप लोन के रूप में लेना चाहते हो।

तब ऐसी परिस्तिथि में 10 प्रतिशत ब्याज पर आपको 600 उधार तो मिल जाएंगे लेकिन एक साल बाद आपको उस 600 रूपए पर 60 रूपए का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा। इसी कारण आपके द्वारा लिए गए वस्तु आपको कूल 1060 रूपए की पड़ती है, मतलब 60 रूपए का अतिरिक्त भुगतान।

खराब क्रेडिट स्कोर और सुरक्षा जमा

अगर क्रेडिट स्कोर किसी कारणवश खराब हो चूका है और आपके पास सुरक्षा जमा के रूप में कुछ ख़ाससंपत्ति भी नहीं है तब आपको शायद ही कोई बैंक ऋण देने के लिए राज़ी हो। अथवा, ऊपर दिए गए दो चीज़ों में से कोई एक चीज़ की भी कमीं हो तब भी आपको लोन मिलने में समस्या हो सकती है।

रीपेमेंट के मामले में सख्त

बैंक अपने लोन रिकवरी के मामले में काफी शाक्त होती है। किसी भी कारणवश अगर आपका एक भी महीना EMI का छूटा तब बैंक द्वारा आपका क्रेडिट स्कोर को कम कर दिया जाता है। बार-बार समय पर EMI नहीं चुकाने के परिस्तिथि में आपका क्रेडिट स्कोर हमेशा के लिए खराब भी किया जा सकता है और फिर भविष्य में आपको किसी तरह की लोन मिलने में भबि काफी समस्याओं का सामना करना पर सकता है।

प्रोसेसिंग फीस

ज़्यादातर बैंक लोन आवंटित करने के लिए प्रोसेसिंग फीस भी लेते हैं जोकि पहले से परेशां और हतास लोगों के लिए एक भरी समस्या उत्त्पन्न करती है। केवल यही नहीं कभी कभी-कभी इन प्रोसेसिंग फीस को लोन के रूप में दिए रहे पैसों से कटौती कर ली जाती है। इसलिए लोन आवंटन करवाने से पहले यह अवश्य जनक ले की प्रोसेसिंग फी के नाम पर आपको ज़्यादा बेवक़ूफ़ तो नहीं बनाया जा रहा है।

अंतिम शब्द

इस लेख के माध्यम से आपने जाना की बैंक लोन के फायदे और नुकसान क्या हैं? और साथ में आपने इसके प्रकार को भी जाना। लेख से सम्बंधित किसी तरह की कोई सवाल, शिकायत या सुझाव आपके मन में हो तब निचे कमेंट करके हमें अवश्य बतलायें, धन्यवाद।

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