डिजिटल करेंसी क्या है? भारत में डिजिटल करेंसी का भविष्य

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Last Updated on July 25, 2021 by WikiHindi

आपने हाल ही के दिनों में अखबार या किसी अन्य माध्यम से यह RBI Digital Rupee के बारे में पढ़ा या किसी से सुना होगा और साथ ही आपने एक शब्द CBDC भी सुना होगा और ये साड़ी चीज़ें आपको कहीं न कहीं अनजान जरूर लग रही होगी की आखिर ये सब है क्या और इसके मायने क्या है? तो ज़्यादा परेशान न हो, इस लेख के अंत तक आपको आपके मन में उठ रहे ऐसे सारे सवालों के उत्तर मिल जाएंगे।

डिजिटल करेंसी
रुपए: डिजिटल करेंसी

CBDC क्या है?

अंग्रेजी में CBDC का अर्थ है Central Bank Digital Currency. CBDC मुख्यता किसी भी देश में उसके उस देश के सेंट्रल बैंक के द्वारा डिजिटल मुद्रा जारी करने से लेकर के इसके प्रचलन में लाने और उसके प्रचार-प्रसार के लिए काम करती है। CBDC के कांसेप्ट को अगर समझने की कोशिश करें तब यह पूरी तरह से बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टो करेंसी से प्रेरित है लेकिन यह बिटकॉइन या क्रिप्टो करेंसी को सत प्रतिशत फॉलो नहीं करता।

डिजिटल करेंसी क्या है?

डिजिटल करेंसी एक प्रकार से आभासी मुद्रा है जो नोट या सिक्कों के के भौतिक रूप में न होकर आभासी रूप में होती है जिसका इस्तेमाल स्मार्टफोन या कंप्यूटर के जरिये ऑनलाइन लेनदेन में किया जाता है। यह किसी भी क्रिप्टोकरेंसी से बिलकुल अलग होता है क्यूंकि इसपर सरकारी और उस देश के सेंट्रल बैंक का पूर्ण रूप से नियंत्रण होता है, जो CBDC के अंतरत होती है।

डिजिटल करेंसी कैसे काम करती है?

जैसा की आप सभी जानते हैं की बिटकॉइन या फिर क्रिप्टो करेन्सी पर किसी भी देश की बैंक या वहां की सरकार का नियंत्रण नहीं होता पर CBDC द्वारा जारी किये जाने वाली डिजिटल मुद्रा पर पूर्ण रूप से उस देश की सेंट्रल बैंक और सरकार का नियंत्रण होता है और इस वजह से लेन-देन के लिए ये मुद्रा काफी ज़्यादा सुरक्षित माना जाता है। CBDC द्वारा जारी की जानी वाली डिजिटल करेंसी, बिटकॉइन की तरह ब्लॉक चैन टेक्नोलॉजी पर आधारित नहीं होती। यह कुछ सॉफ्टवेयर प्रोग्राम के तहत अपने काल्पनिक स्तिथि में मौजूद होती है।

सेंट्रल बैंक, डिजिटल करेंसी को इस्तेमाल में लाने के लिए ज़्यादातर डाटाबेस का इस्तेमाल करती है और इन डाटाबेस में ही सारी जानकारी को सुरक्षित रूप से सेव करके रखा जाता है तथा इन डाटाबेस को हैक होने से बचाने के लिए सेंट्रल बैंक प्राइवेसी और क्रिप्टोग्राफ़ी जैसी सुरक्षा प्रणाली का इस्तेमाल करती है।

डिजिटल करेंसी के कितने प्रकार हैं?

अगर हम क़ानून के नजरिये से अगर देखे तब डिजिटल करेंसी दो प्रकार के होते हैं, पहला है केंद्रीयकृत करेंसी और दूसरा है विकेन्द्रीयकृत डिजिटल करेंसी।

  1. केंद्रीयकृत करेंसी(Centralized Currency): वैसी डिजिटल करेंसी जिस पर किसी देश की सरकार या उसके संगठन का नियंत्रण होता है उसे केंद्रीयकृत करेंसी के नाम से जाना जाता है। जैसे: डिजिटल रुपया
  2. विकेन्द्रीयकृत करेंसी (Decentralized Currency): वैसी डिजिटल करेंसी जिस पर किसी देश की सरकार या उसके संगठन का नियंत्रण नहीं होता है उसे विकेन्द्रीयकृत करेंसी के नाम से जाना जाता है। जैसे: बिटकॉइन, डोगे कॉइन, एथेरियम इत्यादि।

डिजिटल करेंसी को अपनाने वाला सबसे पहला देश कौन था?

पुरे विश्व में अगर सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की बात करें तब चीन ने सबसे पहले CBDC के तहत डिजिटल करेंसी जारी किया था और अब भारत की सेंट्रल बैंक यानी रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया भी इस ओर अपनी कदम बढ़ा चुकी है। आने वाले कुछ महीनो में आप अपने देश भारत की डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल कर पाएंगे।

CBDC के तहत डिजिटल करेंसी पर काम करने वाले देश

  • चीन
  • बहामास
  • ब्राज़ील
  • यूरोपियन यूनियन
  • फ्रांस
  • स्विट्ज़रलैंड
  • ईरान
  • नॉर्वे
  • रूस
  • भारत
  • अमेरिका
  • उरुग्वे
  • वेनेज़ुएला
  • उक्रैन
  • स्वीडन
  • टर्की
  • इक्वेडोर
  • सऊदी अरब

डिजिटल करेंसी के फायदे

  • जोखिम को कम करता है: किसी भी वस्तु या सेवा के उपयोग के पश्चात उसके बदले में किया जाने वाला पेमेंट समय पर हो सकेगा और पैमेंट में होने वाली देर को यह काफी हद तक काम करने में सक्षम होगा।
  • जटिलता को काम करता है: इसमें जरिये किये गए पेमेंट को आसानी से सीधा पियर टू पियर ट्रांसफर किया जा सकेगा।
  • तकनीकी दक्षता: लेनदेन के बिच में किसी बैंक के मध्यस्ता न होने के वजह से पैसों का लेनदेन रियल टाइम में किया जा सकेगा।
  • वित्तीय समावेश: इस प्रक्रिया के जरिये देश में छोटे से छोटे व्यापारी वर्ग के लोग और आम इंसान आसानी से कम से कम शुल्क में पैसों का लेनदेन करने में सक्षम बनेगा और इस वजह से देश में वित्तीय समावेश को बढ़ावा मिलेगा।
  • कर संग्रह: डिजिटल करेंसी के जरिये पारदर्शिता बढ़ेगी और हर एक छोटे से छोटे लेनदेन का हिसाब रखा जाएगा जिससे लोग कर की चोरी नहीं कर सकेंगे और सरकार को कर संग्रह में आसानी होगी और कर संग्रह में वृद्धि भी होगी।
  • आपराधिक गतिविधियों को कम करता है: कर की चोरी बहुत हद तक रुकेगी और आपराधिक गतिविधि में संलिप्त लोगो के लेनदेन की जानकारी ऑनलाइन मौजूद होगी और इससे आपराधिक गतिविधियों में काफी हद्द तक कमी आएगी।
  • लेन-देन का प्रमाण: प्रत्येक लेनदेन का प्रमाण केवल एक क्लिक में इंटरनेट के माध्यम से आप देख सकेंगे।
  • भुगतान प्रणाली को सुरक्षित करता है: उच्च प्रणाली की क्रिप्टोग्राफ़ी जैसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर इसे सुरक्षित बनाया जाता है और इस वजह से यह भुगतान प्रणाली सुरक्षित शाबित होगा।

डिजिटल करेंसी से जुड़े खतरे

  • बैंकिंग सिस्टम से आम नागरिको का दुरी बढ़ना: डिजिटल करेंसी के आने के पश्चात आम नागरिक इसकी ओर ज़्यादा आकर्षित होंगे और तत्पश्चात लोगों का बैंकिंग सिस्टम से दुरी बनने पर बैंकिंग सिस्टम के लेखा-जोखा पर काफी ज़्यादा असर हो सकता है।
  • विदेशी मुद्रा के इस्तेमाल बढ़ना: डिजिटल करेंसी का उपयोग अत्यधिक होने पर अपने देश में ही विदेशी मुद्राओं जैसे डॉलर का प्रचलन बढ़ेगा।
  • संभावित सुरक्षा से जुड़े कारण: इस प्रकार के करेंसी को कितना भी सुरक्षा प्रदान कर दी जाए फिर भी इसमें खतरा बना रहेगा इसके जरिये आम डाटा और अन्य प्रकार के डाटा का लीक होने का खतरा बना रहेगा।

भारत में डिजिटल करेंसी

देश की सेंट्रल बैंक रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के डिप्टी गवर्नर ने हाल ही में अपने दिए बयान में कहा है की RBI अपना डिजिटल करेंसी को लांच करने की ओर काम कर रही है। उन्होंने अपने बयान में ये भी कहा है की हर उन पहलु को देखा जा रहा की कहाँ इसका उपयोग किया जा सकेगा और कहाँ नहीं और साथ ही इसको भारत में चरणबद्ध तरीके से लांच किया जाएगा।

प्रचलन में आने के पश्चात नोटों की छपाई में लगने वाले पैसों को बचाया जा सकेगा और इसी से ऍम लोग प्राइवेट करेंसी जैसे बिटकॉइन और अन्य डिजिटल करेंसी की तरह ही भारत के अपने डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल कर सकेंगे। चूँकि RBI द्वारा लांच की जाने वाली करेंसी पर पूर्ण रूप से RBI का नियंत्रण होगा इसलिए इसमें वोलैटिलिटी जैसी समस्या से आम नागरिकों बचेंगे और किसी प्रकार का कोई खतरा इसमें शामिल नहीं होगा।

शुरूआती दौर में CBDC के तहत जारी किया जाने वाला डिजिटल करेंसी को RBI खुदरा और थोक क्षेत्र में शुरुआत करने का विचार बना रही है।

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निष्कर्ष

इस लेख के माध्यम से आपने यह सीखा की डिजिटल करेंसी होता क्या है? यह कैसे काम करता है? इसके फायदे तथा नुक्सान और साथ ही भारत में जल्द ही लांच होने वाली डिजिटल करेंसी के बारे में पढ़ा और इसे समझा। इस लेख से जुड़ा किसी प्रकार का कोई ख्याल आपके मन में हो तब निचे कमेंट करके बताएं आपके हर एक सवालों के जवाब देने की कोशिश की जाएगी, धन्यवाद।

FAQ’s

Q: डिजिटल करेंसी क्या है?

Ans: डिजिटल करेंसी एक प्रकार से आभासी मुद्रा है जो नोट या सिक्कों के के भौतिक रूप में न होकर आभासी रूप में होती है जिसका इस्तेमाल स्मार्टफोन या कंप्यूटर के जरिये ऑनलाइन लेनदेन में किया जाता है।

Q: भारत में डिजिटल करेंसी कब आएगा?

Ans: देश की सेंट्रल बैंक रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के डिप्टी गवर्नर ने हाल ही में अपने दिए बयान में कहा है की RBI अपना डिजिटल करेंसी को लांच करने की ओर काम कर रही है। उन्होंने अपने बयान में ये भी कहा है की हर उन पहलु को देखा जा रहा की कहाँ इस दिगीतालकर्रेंसी का उपयोग किया जा सकेगा और कहाँ नहीं और साथ ही डिजिटल करेंसी को भारत में चरणबद्ध तरीके से लांच किया जाएगा।

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