भारत में म्युचुअल फंड्स के प्रकार

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Last Updated on August 25, 2021 by WikiHindi

म्युचुअल फंड आपको निवेश का एक विविध पोर्टफोलियो बनाने में आपकी मदद करता है और यह निवेश करने के सबसे आसान तरीकों में से एक है, क्युकी इसके लिए आपको किसी दूसरे इंसान की जरुरत नहीं पड़ती। म्युचुअल फंड्स की थोड़ी सी ज्ञान और आपके पास इंटरनेट से जुड़ा आपका स्मार्टफोन अथवा लैपटॉप ही काफी है म्युचुअल फंड्स में निवेश करने के लिए

भारत में म्युचुअल फंड्स के प्रकार
म्यूच्यूअल फंड्स के प्रकार

संरचना के आधार पर म्युचुअल फंड्स के प्रकार

  1. Open-Ended Funds (ओपन एंडेड फंड्स): वैसे म्युचुअल फंड्स जिसमे निवेशक कभी भी अपनी इक्षा अनुसार इसमें निवेश कर सकते हैं और अपनी सुविधा अनुसार इससे कभी भी पैसे निकाल सकते हैं। अर्थात इस प्रकार के म्युचुअल फंड्स में किसी प्रकार की कोई समय की बाध्यता नहीं होती, इसमें पूरी तरह से आपकी मर्ज़ी चलती है।
  2. Closed-Ended Funds (क्लोज्ड एंडेड फंड्स): वैसे म्युचुअल फंड्स जिसमे निवेशकों के पास समय की बाध्यता होती है और Maturity के पूरा होने पर ही वो इस प्रकार के फंड्स से पैसों को निकाल पाते हैं। Maturity के पूरा होने पर इसमें से पैसे खुद ही निकले जाते हैं अथवा आपके बैंक अकाउंट में भेज दिए जाते है। इस तरह के फंड्स की ख़ास बात यह है की यह शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध (Listed) होती हैं।
  3. Interval Funds (इंटरवल फंड्स): ऐसे फंड्स ऊपर दिए गए दोनों फंड्स के बिच में आते हैं, क्यूंकि ऐसे फंड्स में आप मनचाहे एक ख़ास समय अंतराल के दौरान अपने म्यूच्यूअल फंड्स के यूनिट्स को खरीद या बेच सकते हैं।

एसेट के आधार पर म्युचुअल फंड्स के प्रकार

  1. इक्विटी फंड्स: वैसे म्युचुअल फंड्स जो कंपनी के शेयर में पैसों को निवेश करती है और इसमें मिलने वाला प्रॉफिट पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है की शेयर बाजार में कंपनियों के शेयर कैसे पेश आते हैं। ऐसे फंड्स एक तरफ काफी ज़्यादा आपको फायदा पहुंचती है तो वहीँ दूसरी तरफ इसमें बाकियों की तुलना में थोड़े खतरे भी सम्मिलित होते हैं।
  2. डेब्ट फंड्स: वैसे म्युचुअल फंड्स जो निवेशकों के पैसों को फिक्स्ड इनकम सिक्योरिटी जैसे सरकारी सिक्योरिटी, कॉर्पोरेट बांड्स और ट्रेज़री बिल्स में निवेश करते है उसे डेब्ट फंड्स कहा जाता है। डेब्ट फंड्स थोड़े स्थिर होते हैं और इसमें रिस्क न के बराबर होता है।
  3. हाइब्रिड फंड्स: आप कुछ-कुछ अंदाजा इसके नाम से ही हो गया होगा की, वैसे फंड्स जो इक्विटी फंड्स और डेब्ट फंड्स दोनों ही प्रकार के फंड्स में निवेश करती है, वह हाइब्रिड फंड्स कहलाती है। अब किस फंड्स में कितने का रेश्यो में निवेश किया जाएगा इस बात का फैसला निवेशक कंपनी लेती है। हाइब्रिड फंड्स आम तौर पर बैलेंस भी हो सकते है या फिर इक्विटी फंड्स की तरह रिष्की भी हो सकते हैं।

निवेश लक्ष्य के आधार पर म्युचुअल फंड्स के प्रकार

आप अपनी वित्तीय जरूरतों के अनुरूप भी म्यूच्यूअल फंड्स का चुनाव कर सकते हैं:

  1. कैपिटल प्रोटेक्शन फंड्स: ऐसे म्यूच्यूअल फंड्स में पैसों के कुछ हिस्सों का निवेश कंपनी फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट में करती है और कुछ पैसों का निवेश इक्विटी में करती है। जिससे आपके गाढ़ी कमाई के पैसे सुरक्षित भी रहें और साथ ही इसपर आप प्रॉफिट भी कमा सकें। ऐसे फंड्स से मिले प्रॉफिट के पैसे आयकर के दायरे में आते हैं।
  2. ग्रोथ फंड्स: वैसे फंड्स जिनका एकमात्र उद्देश्य प्रॉफिट कमाना है, वह ग्रोथ फंड्स के श्रेणी में आते हैं। ऐसे फंड्स में पैसों का निवेश बहुत ही बेहतर प्रदर्शन कर रहे कंपनी के स्टॉक्स में ही लगाए जाते हैं। ऐसे फंड्स उनके लिए अच्छे माने जाते हैं जो लम्बी अवधी के निवेश करना चाहते हैं।
  3. लिक्विडिटी आधारित फंड्स: कुछ फंड्स को आपके निवेश की लिक्विडिटी के अनुसार फंड्स में विभाजित किये जाते हैं, और यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है की आप कितने समय अंतराल के लिए पैसों को निवेश करना चाहते हैं। इसमें अल्ट्रा शॉर्ट्स टर्म्स फंड्स वैसे निवेशकों को काफी आकर्षित करते हैं जो केवल कुछ समय के लिए निवेश करना चाहते हैं वहीँ दूसरी ओर रिटायरमेंट फंड्स वैसे निवेशकों को आकर्षित करती है जो लम्बी अवधी के लिए निवेश करना चाहते हैं।
  4. पेंशन फंड्स: इस फंड्स के बारे में आप तो इसके नाम से ही समझ गए होंगे की वैसे फंड्स जो लम्बे समय अंतराल में किये गए निवेश के पश्चात आपको नियमित समय अंतराल पर प्रॉफिट देती रहती है, उसे ही पेंशन फंड्स की श्रेणी में रखा जाता है। आमतौर पर हाइब्रिड फंड्स को ही पेंशन फंड्स के तौर पर देखा जाता है।
  5. Fixed Maturity Funds: आप को नाम पढ़कर इस इस बात का अंदाज़ आ गया होगा की आखिर यह किस प्रकार का म्यूच्यूअल फंड्स है। तो वैसे म्यूच्यूअल फंड्स जो केवल कुछ ख़ास समय अवधी के लिए पैसों को निवेश करती है और ऐसे फंड्स का उद्देश्य निवेशकों को समय अवधी पूरा होने के बाद एक मुश्त फायदा पहुँचाना होता है उसे ही Fixed Mutual Funds कहा जाता है। ऐसे फंड्स में आमतौर पर पैसों को सरकारी सिक्योरिटी बांड्स में लगाती है जिसका समय अंतराल निर्धारित होता है।
  6. टैक्स सेविंग फंड्स: वैसे म्यूच्यूअल फंड्स जिनका मुख्य उद्देश्य सेक्शन 80C के तहत आपके आयकर को बचाना होता है, वैसे फंड्स टैक्स सेविंग की श्रेणी में आते हैं। ऐसे म्यूच्यूअल फंड्स में ज़्यादातर पैसों को सिक्योरिटीज फंड्स में निवेश किया जाता है और यह थोड़ा कम रिष्की होता है।

इसे भी पढ़ें: पैसों की बचत के साथ फालतू खर्चों पर नियंत्रण कैसे करें?

अंतिम शब्द

इस लेख में अपने जाना की भारत में म्यूच्यूअल फंड्स के कितने प्रकार हैं, कहीं न कहीं यह लेख आपको म्युचुअल फंड्स में निवेश के पूर्व आपको अपने अनुसार म्यूच्यूअल फंड्स को चुनने में काफी ज़्यादा मदद करेगा। लेख से सम्बंधित किसी प्रकार की कोई उलझन, समस्या या फिर कोई सुझाव हो तब आप निचे कमेंट करके हमें अवश्य बतलायें, धन्यवाद।

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