हाइड्रोपोनिक खेती क्या है? पोषक तत्व और बाकी पूरी जानकारी

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Last Updated on November 2, 2021 by WikiHindi

आज कल तकनीक और विज्ञान के कारण लगभग सभी क्षेत्रों में काफी तेज़ी से बदलाव हो रहा है। तो कृषि क्षेत्र इससे अछूता कैसे रह सकता है। आजकल तकनीक के बदौलत ही अब बगैर ज़मीन के खेती करना सम्भव हो सका है। आपको बात दें की बगैर ज़मीन के खेती अगर संभव हुआ है तब उसका श्रेय जाता है हाइड्रोपोनिक नामक बिल्कुल नयी तकनीक वाली कहती का। इस लेख के माध्यम से आपको हाइड्रोपोनिक खेती से जुडी लगभग सभी जानकारियां मिलेंगी।

हाइड्रोपोनिक खेती क्या है?

हाइड्रोपोनिक तकनीक खेती करने की एक ऐसी तकनीक या विधि है जिसमे मिटटी या कहें भूमि की अधिक आवश्यकता नहीं पड़ती। इस तकनीक के जरिये आप अपने घर, फ्लैट या अथवा खाली जमीन पर विभिन्न प्रकार के पौधों को लगाकर आर्गेनिक खेती कर सकते हैं।

बिल्कुल नयी तकनीक के इस खेती करने की विधि में सबसे ज़्यादा पोषक तत्वों से भरपूर पानी का इस्तेमाल किया जाता है और साथ ही पौधों को वृद्धि और उसकी स्थिरता के लिए बाहरी ढांचे का उपयोग किया जाता है।

हाइड्रोपोनिक खेती क्या है पोषक तत्व और बाकी पूरी जानकारी
हाइड्रोपोनिक खेती क्या है?

हाइड्रोपोनिक खेती की जरूरतें

हाइड्रोपोनिक खेतों में कुछ जरूरत की इस प्रकार हैं:

  • साफ़ पानी: पानी ही इस तकनीक की खेती में सबसे अहम् भूमिका निभाती है। लेकिन कोई भी पानी देने से काम नहीं बनने इसमें आपको इस बात का ख्याल रखना होगा की पानी की pH मात्रा 6 से 6.5 के आसपास ही हो।
  • जड़ों को सहारा: जैसा की आप जानते हैं की पौधे जमीन पर अच्छी तरीके से तभी खड़े हो पाते हैं जब उनके जड़ों की पकड़ मिटटी में अच्छी हो। लेकिन इस तकनीक में मिट्टी की आवश्यकता नहीं पड़ती तो फिर पौधों के जड़ कैसे खड़े रह पाएंगे? तब आपको बता दें की आप ऐसी परिस्तिथि में वर्मीक्यूलाइट, पेर्लाइट या फिर नारियल के रेशों का इस्तेमाल कर सकते हैं। एक बात याद रहे की आप किसी ऐसी चीज़ या वास्तु का इस्तेमाल ना करें जिसमे पानी को रोकने या उसे सोखने की क्षमता न हो।
  • रौशनी: किसी भी पौधों को जीवित और हरी भरी रखने के लिए फोटोसिंथेसिस प्रक्रिया की जरुरत होती है। फोटोसीस्टेसिस में सबसे महत्वपूर्ण घटक सूर्य की रौशनी होती है। हाइड्रोपोनिक खेती में आपको पौधों तक अच्छे से रौशनी पहुंचने के लिए कुछ अतिरिक्त पैसों को खर्च करने की जरुरत पड़ सकती है।
  • पोषक तत्व: जब पौधे जमीन में होते हैं तो उन्हें जरूरी पोषक तत्व जैसे मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और कैल्शियम इत्यादि सभी ज़मीन से मिल जाती है लेकिन यहां मिट्टी की अनुपस्थिति के कारण यह संभव नहीं है तब इसके लिए आप ऐसे पोषक तत्वों के घोल को खरीद कर पानी में मिला सकते हैं।
  • ऑक्सीजन: ज़मीन पर उगे पौधों को तो ऑक्सीजन मिटटी में स्तिथ ऑक्सीजन से मिल जाती है, लेकिन हयड्रोफोनिक तकनीक में पौधों तक दो माध्यम से ऑक्सीजन पहुंचाया जाता है। पहला या तो आप पानी के टैंक और पौधों के बिच कुछ स्थान खाली छोर दें या फिर आप अपने टैंक में मछलियों का दाल कर रखें ये बुलबुलों के जरिये पानी में ऑक्सीजन मिश्रित कर देंगी।

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हाइड्रोपोनिक तकनीक की जरुरत क्यों पड़ी?

आपको बता दें की हाइड्रोपोनिक तकनीक के जरिये खेती करने पर सबसे पहले तो अत्यधिक भूमि की आवश्यकता नहीं पड़ती और दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात ये है की इसके जरिये आर्गेनिक खेती करना काफी आसान हो गया है।

वर्तमान समय में सब्जियां दूसरे शहरों से ट्रक के माध्यम से आते हैं जिसमे कई दिनों का समय लग जाता है। इतना समय लगने के कारण सब्जियों की गुणवत्ता कम हो जाती है। इसलिए इस तकनीक का यपयोग कर शहर के निवासी अपने-अपने घरों और छतों पर भी खेती कर सकते हैं और सुद्ध एवं स्वक्ष भोजन कर खुद को स्वस्थ रख सकते हैं।

अंतिम शब्द

इस लेख के माध्यम से अपने जाना की हाइड्रोपोनिक खेती क्या होता है? साथ ही आपने इससे जुड़े कुछ महत्वपूर्ण घटकों को भी जाना और पढ़ा। इस लेख से सम्बंधित किसी तरह के सुझाव या सवाल आपके भी मन में हो तब निचे कमेंट करके हमें अवश्य बतलायें, धन्यवाद।

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