श्री कृष्ण जन्माष्टमी कब, क्यों और कैसे मनाया जाता है? शुभ मुहूर्त, मंत्र और महत्व

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Last Updated on August 13, 2021 by WikiHindi

जन्माष्टमी जिसे की कृष्णा जन्माष्टमी के नाम भी भी बहुत सारे लोग जानते हैं, इस त्यौहार को लोग भगवान् श्री कृष्णा के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं। आज के इस लेख में आपको कृष्णा जन्माष्टमी से जुड़ी हर वह जानकारी जैसे इस त्यौहार को क्यों मनाया जाता है? जन्माष्टमी का क्या महत्व है और साथ ही इसे कैसे मनाया जाता जैसे कई सारे सवालों के उत्तर आपको इस लेख के अंत तक मिलेंगे।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी कब, क्यों और कैसे मनाया जाता है शुभ मुहूर्त, मंत्र और महत्व
श्री कृष्ण जन्माष्टमी 2021

कृष्ण जन्माष्टमी को क्यों मनाया जाता है?

कृष्ण जन्माष्टमी को मनाने का सबसे बड़ा कारण है भगवान् श्री कृष्ण का जन्म, जी हाँ इसी दिन हिन्दुओं के देवता श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। श्री कृष्ण हिन्दू धर्म में सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक हैं और ऐसी मान्यता है की इनका जन्म लगभग 3228 ईशा पूर्व माता देवकी के घर मथुरा में भाद्रपद महीने के आठवें दिन मध्यरात्रि को हुआ था।

यह त्यौहार केवल भारत तक ही सिमित नहीं है बल्कि इस त्यौहार को पकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, फिजी और अमेरिका जैसे देशों में रह रहे भारतीय और हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग बड़े ही धूम-धाम से मनाते हैं।

कृष्ण जन्माष्टमी कब मनाया जाता है?

श्री कृष्ण जन्माष्टमी को कुछ लोग जन्माष्टमी और वहीं कुछ लोग गोकुल अष्टमी के नाम से भी जानते हैं। इस त्यौहार को भाई-बहन के प्यार का प्रतिक माने जाने वाला रक्षाबंधन के ठीक आठवें दिन बाद मनाया जाता है। अगर हम पंचांग की बात करें तब इस त्यौहार को प्रत्येक वर्ष भाद्रपद महीने के अष्टमी के मध्यरात्रि को मान्य जाता है। क्यूंकि इस समय भगवन श्री कृष्णा का मथुरा में जन्म हुआ था।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी को कैसे मनाया जाता है?

किसी भी त्यौहार को मनाने के तरीके सबके अपने-अपने तरीके हैं। उसी प्रकार कृष्णजन्माष्टमी को लोग अपने-अपने तरीको से मनाते हैं। इस त्यौहार को मनाने के लिए लोग उपवास रखते हैं और साथ ही रात्रि जागरण करते हैं। इस रात्रि जागरण के दौरान भजन कीर्तन, नृत्य-संगीत, रासलीला, श्री कृष्णा से जुड़े नृत्य और नाट्य रूप प्रस्तुत किये जाते है, और भगवान् श्री कृष्ण के बाल स्वरुप को सबसे पसंदीदा भोजन दूध, दही और मक्खन से तैयार भोग इन्हे लगाया जाता है।

जन्माष्टमी त्यौहार का महत्व क्या है?

श्री कृष्ण का जन्म एक ऐसे क्षेत्र में हुआ था, जहाँ कंश नामक राजा की अराजकता फैली हुई थी। आम जनता पर उत्तपीड़न हद से ज़्यादा बाद चुकी थी, स्वतंत्रता नाम की कोई चीज़ मायने नहीं रखती थी, चारो ओर केवल बुराइयां ही हुआ करती थी इन्ही सब चीज़ों का अंत करने के लिए भगवान् विष्णु ने 8वें अवतार में श्री कृष्णा का अवतार लेकर कर पृथ्वी पर आये थे।

श्री कृष्ण को हिन्दू धर्म को मानाने वाले लोग इन्हे त्रिमूर्ति और विष्णु के अवतार मानते हैं, और त्रिमूर्ति में तीन देवता शामिल है जो दुनिया-रखाव, निर्माण और विनाश के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं। भगवान् विष्णु को ब्रह्माण्ड का संरक्षक और रक्षक माना जाता है और इनका काम है पृथ्वी से बुराइओं का नष्ट करना और साथ ही अच्छे-बुरे के बिच तालमेल बनाये रखना और यही वजह है दुनिया में तब बढ़ रहे बुराइओं को कम करने के लिए भगवान् विष्णु ने कृष्ण का अवतार लेकर पृत्वी पर आये और बुराइओं का विनाश किया।

कृष्ण जन्माष्टमी को घर पर कैसे मनाये?

श्री कृष्ण जन्माष्टमी को आप निचे दिए गए कुछ विधियों को फॉलो करके अपने घर पर अपने परिवार के साथ मना सकते हैं:

  • जितना संभव हो सके आधी रात तक उपवास रखें।
  • पारम्परिक भोजन तैयार करें जिसे आप रात के समय श्री कृष्ण को भोग लगाएंगे।
  • अपने घर और ख़ास कर घर में स्तिथ मंदिर जहाँ बाल-गोपाल विराजमान हैं वहां आप फूल-पत्तियों, गुब्बारों और अन्य सजावट की चीज़ों से सजाएं।
  • अगर सम्भव हो तब घर में परिवार के साथ बैठकर किसी मंदिर में हो रहे जन्माष्टमी की पूजां का लाइव प्रसारण देखें।
  • अगर आपके घर में कोई बच्चे हैं तब उन्हें बाल-गोपाल की वेश-भूषा में अवश्य तैयार करें।
  • घर में स्तिथ कृष्ण और बाल गोपाल की मूर्तिओं को स्नान कराएं और उन्हें नए वस्त्र पहनाएं।
  • मध्य रात्रि को पूजा का आयोजन करें और साथ ही परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर भजन कीर्तन, और आराधना का प्रबंध करें।

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श्री कृष्ण जन्माष्टमी मंत्र

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दौरान आप श्री कृष्ण की आराधना के लिए इस मंत्र का जाप करें।

ज्योत्स्नापते नमस्तुभ्यं नमस्ते ज्योतिशां पते।

नमस्ते रोहिणी कान्त अर्घ्य मे प्रतिगृह्यताम्।।

2021 में कृष्ण जन्माष्टमी का मुहूर्त और पारण का समय क्या है?

  • तिथि: 30 अगस्त 2021
  • दिन: सोमवार
  • अष्टमी की शुरुआत: 29 अगस्त 2021, दिन रविवार को रात के 11:25 से।
  • अष्टमी का समापन: 30 अगस्त 2021, दिन सोमवार को रात के 01:59 तक।
  • पूजा का शुभ मुहूर्त: 30 अगस्त 2021, को रात 11:59 से 12:44 तक।
  • पारण का समय: 31 अगस्त 2021, को सुबह 09:44 के बाद कभी भी।

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कृष्ण जन्माष्टमी की अगले 7 साल की तिथि

वर्षतिथिदिन
202218 अगस्त 2022गुरुवार
20236 सितम्बर 2023बुधवार
202426 अगस्त 2024सोमवार
202516 अगस्त 2025शनिवार
20264 सितम्बर 2026शुक्रवार
202725 अगस्त 2027बुधवार
202813 अगस्त 2028रविवार
कृष्णा जन्माष्टमी की अगले 7 साल की तिथि

2021 में श्री कृष्ण जन्माष्टमी पूजन करने की विधि वीडियो

Source: सारेगामा भक्ति official YouTube Channel

अंतिम शब्द

इस लेख में आपने कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में जाना और पढ़ा और साथ में यह भी जाना की वर्ष 2021 में इसके शुभ मुहूर्त क्या है। इस लेख से सम्बंधित किसी प्रकार की कोई शंका या सुझाओ आपके मन में हो तब निचे कमेंट करके हमें अवश्य बतलायें, धन्यवाद।

FAQs

कृष्ण जन्माष्टमी 2021 का शुभ मुहूर्त क्या है?

  • तिथि: 30 अगस्त 2021 दिन: सोमवार अष्टमी की शुरुआत: 29 अगस्त 2021, दिन रविवार को रात के 11:25 से। अष्टमी का समापन: 30 अगस्त 2021, दिन सोमवार को रात के 01:59 तक।पूजा का शुभ मुहूर्त: 30 अगस्त 2021, को रात 11:59 से 12:44 तक। पारण का समय: 31 अगस्त 2021, को सुबह 09:44 के बाद कभी भी।
  • श्री कृष्ण जन्माष्टमी मंत्र

    ज्योत्स्नापते नमस्तुभ्यं नमस्ते ज्योतिशां पते!नमस्ते रोहिणी कान्त अर्घ्य मे प्रतिगृह्यताम्

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