जाने प्यार क्या है और कैसे होता है?

किसी शायर ने खूब कहा है, वो प्यार ही क्या जिसे शब्दों में बयाँ किया जाए। लेकिन इस लेख के माध्यम से हमारी प्रयास यही होगी की आपको प्यार का मतलब बता सकें। इस लेख के माध्यम से आप जान पाओगे की आखिर प्यार अर्थात Love क्या है और ये कैसे होता है? इसके अलावा आप कुछ हद तक ये भी जानोगे की आखिर प्यार कैसे किया जाता है? इस लेख को पढ़ने के बाद, आप खुद ही अंदाजा लगा लोगे की सच्चा प्यार आखिर होता क्या है?

प्यार क्या है?

प्यार को परिभाषित करना थोड़ा मुश्किल है। लेकिन फिर भी अगर कोई ये जानना चाहे की प्यार क्या होता है? तब आसान भाषा में आपको बता दूँ। प्यार भावनाओं और व्यवहारों का गठजोड़ है। जो एक दूसरे के बिना अधूरा है। प्यार में भावनाओं अर्थात Emotions का होना अनिवार्य है। लेकिन अगर प्यार में व्यवहार ही उपस्तिथ न हो, तब वैसा प्यार अधूरा रह जाता है।

प्यार में ऐसी कई सारी चीज़ें है, जिन्हे शामिल किया जाता है जैसे: केयर, नजदीकियां, आकर्षण, स्नेह और सबसे महत्वपूर्ण विश्वास। प्यार अर्थात भावनाओं और व्यवहारों का गठजोड़ हमें एक दूसरे के प्रति जूनून और प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। समय के साथ प्यार में बदलाव होना आम बात है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि प्यार के साथ सकारात्मक भावनाएं जैसे: खुशियां, उत्साह इत्यादि का जुड़ाव होता है। जिससे प्यार समय के साथ बढ़ता है।

तो वहीँ दूसरी तरफ नकारात्मक भावनाएं जैसे: तनाव और जलन अर्थात ईर्ष्या के कारण प्यार में कमी आना भी आम बात है। इसलिए ये कहना बिल्कुल गलत होगा की प्यार स्थिर होता है। इसमें समय के साथ बदलाव आना बिल्कुल लाजमी है।

जब बात प्यार की आती है, तब कुछ लोगों का ऐसा मानना है की ये भगवान का दिया सबसे ख़ास तोहफों में से एक है। आपको बता दूँ, सबसे ज़्यादा रिसर्च होने के बाद भी आज प्यार को पूरी तरह से समझ पाना नामुमकिन है।

प्यार कितने प्रकार का होता है?

कई सारे लोगों को इस बात का ज़रा सा भी अंदाजा नहीं होता की आखिर प्यार कितने तरह के हो सकते हैं। अगर आप इस बात को समझने में भूल कर रहे हैं की आपका प्यार किस श्रेणी में आता है। तब निचे दिए गए प्यार के प्रकार को अवश्य पढ़ें।

  • भावनात्मक प्रेम: भावनात्मक प्रेम को प्यार का सबसे अनूठा और सबसे मजबूत माना जाता है। क्योंकि इसमें दो लोग एक दूसरे की भावनाओं से जुड़े होते हैं।
  • शारीरिक प्रेम: जैसा की आप इसके शब्दों के समझ गए होंगे। शारीरिक प्रेम का अर्थ ही है, प्रेम का वैसा तरीका जिसमे शारीरिक चेष्टा को परिपूर्ण करने की लालसा होती है।
  • आध्यात्मिक प्रेम: आध्यात्मिक प्रेम अपने आप में काफी अनोखा है। क्योंकि इसमें किसी प्रकार की कोई चेष्टा नहीं होती। इसमें शारीरिक जुड़ाव नहीं होता और नाहीं इसमें किसी तरह की कोई डिमांड होती है। आमतौर पर भगवान् के प्रति किये जाने वाले प्रेम को आध्यात्मिक प्रेम कहा जाता है।
  • खुद से प्यार: अगर आप उनलोगो में से जो खुद का ख्याल बाकियों की तुलना में अधिक रखते हो। तब ये इस बात की और संकेत है की आप अपने आप से काफी ज़्यादा प्यार करते हो। अर्थात आप खुद से प्रेम करते हो। इसके अलावा आप अपनी अच्छाइयों के साथ-साथ आप अपनी बुराइओं को भी बेहतर ढंग से जानते हो। फिर खुद अपनी जरूरतों के अनुसार आप अपने भीतर एक बदलाव लाते हो।
  • एक तरफ़ा प्यार: प्रेम के मामले में सबसे कष्टदाई माना जाने वाला एक तरफा प्यार होता है। क्योंकि इसमें सामने वाले से आप वापस प्रेम पाने की उम्मीद नहीं करते। कहीं न कहीं आप जानते हो की आपका प्यार आप तक ही सिमित रह जाएगा।
  • पप्पी वाला प्यार: ये बड़ा ही अनोखा है, और ये प्यार आपको भी अपने बचपन के दिनों में जरूर हुआ है। क्योंकि बचपन में आपको अपने टीचर या फिर आपकी पड़ोस की दीदी से होने वाले लगाव को ही पप्पी वाला प्यार कहा जाता है।

जाने प्यार में होने पर क्या-क्या होता है?

प्यार का एहसास कब, किसे और कहाँ हो जाये। इस बात को बता पाना लगभग नामुमकिन है। लेकिन हाँ, प्यार में पड़े हुए इंसान के साथ कुछ अजीबों गरीब घटनाएं होती है। जिससे ये पता लगा पाना काफी आसान हो जाता है, की कोई इंसान प्यार में है या नहीं। प्यार का एहसास होने मात्र ही लोगों के मन में काफी बदलाव होने शुरू हो जाते हैं। प्यार में पड़े इंसानो में आमतौर पर कुछ इस तरह के बदलाव देखे जाते हैं।

  • जब किसी इसी इंसान को प्यार होता है, तब वो खोया-खोया सा रहने लगता है।
  • इंसान के अनादर खुद से बात करने की प्रबल इक्षा भी जागृत होने लगती है।
  • गलती से आँखें बंद हुई नहीं की आपको अपने प्यार का चेहरा सामने दिखने लगेगा।
  • दोस्तों ने आपके प्यार का नाम क्या ले लिया, फिर तो आपकी खुसी अंदर ही अंदर हिचकोले मारने लगती है।
  • जुबान और दिमाग शांत होने पर भी दिल कुछ कहना चाहता हो।
  • दोस्तों ने देरी की तब आप भड़क जाओगे। लेकिन अगर आपके प्यार ने देर किया, तब आपको ये इंतज़ार सुकून देता है।
  • जब हस्ते हुए अचानक से आपको अपने प्यार की याद आये और आपके आँखों में खुसी के आंसू आ जाए।
  • सपाट ज़मीन पर ठोकर लगना प्यार में पड़े इंसानो के साथ तो आम बात है।
  • अचानक से ड्रेसिंग सेन्स में बदलाव आना लाजमी है।
  • दोस्तों या सहेलियों के साथ अपने प्यार के बारे में बातें करके समय बिताना, आपका पसंदीदा तिमेपास हो जाएगा।
  • आपके मोबाइल में रोमांटिक गानों की भरमार हो जाएगी।

सच्चा प्यार है या नहीं? कैसा पता करें?

दुनिया की सबसे मुश्किल कामों में से एक है। इस बात का पता लगाना की आखिर किसी का आपके प्रति प्यार सच्चा है या नहीं? या ऐसा भी कहें की आप जिसे पसंद करते हो, क्या ये Love के अलावा केवल Like तो नहीं! प्यार जैसी चीज़ों पर काफी ज़्यादा ज्ञान रखने वाले दुनिया के जाने-माने मनोवैज्ञानिक Zick Rubin के अनुसार, प्यार के तीन भाग होते हैं।

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  • जुड़ाव अर्थात Attachment: अगर आप हर घरी हर वक़्त केवल उस ख़ास इंसान के बारे में सोचते हो और उनके साथ रहने का ख्याल आपके में में आता है। तब ये आपके जुड़ाव को दर्शाता है।
  • देखभाल करना अर्थात केयर करना: जितनी देखभाल और प्यार आप खुद से करते हो। ठीक उतना ही आप किसी खास इंसान से करते हो, तो ये इस बात की और इशारा करता है, की आप उनसे सच्चा प्यार करते हो।
  • घनिष्ठता: अगर आप अपने किसी खास इंसान पर हद से ज़्यादा भरोसा करते हो और आप अपने व्यक्तिगत विचारों के साथ ही अपने भावनाओ और चाहत को साझा करते हो। तब ये सारे लक्षण इस बात की और इशारा करती है की आप उनसे बेइंतेहा प्यार करते हो।

अंतिम शब्द

इस लेख के माध्यम से आपने जाना की प्यार क्या है? और आपने ये भी जाना की प्यार कैसे किया जाता है? इसके अलावा आपने जाना की सच्चे प्यार की पहचान कैसे करें। इस लेख से सम्बंधित किसी प्रकार की कोइ शिकायत, सुझाव या सवाल आपके मन में हो तब निचे कमेंट करके हमें जरूर बताएं, धन्यवाद।

FAQs

Q: क्या प्यार की कोई सीमा होती है?

उत्तर: प्यार की कोई सिमा नहीं होती। ये एक ऐसी भावना है जो समय के साथ दब सकती है। लेकिन कभी कम नहीं होती।

Q: क्या प्यार करना गलत है?

उत्तर: जी नहीं प्यार करना बिल्कुल भी गलत नहीं है। प्यार को ऊपर वाले का दिया हुआ सबसे बड़ा तोफा माना गया है।

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