एकादशी कब है? समय, तिथि के साथ जाने | December 2022 Ekadashi Kab Hai

एकादशी (Ekadashi) अर्थात ग्यारस (Gyaras) कब है? ये जानने से पहले हमारे लिए ये जानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है की आखिर एकादशी क्या है? इस लेख में एकादशी की तिथि की जानकर समय के साथ होने के अलावा आप ये भी जानोगे की आखिर इसे कब मनाया जाता है, इसका महत्व क्या और एकादशी का वैज्ञानिक तथ्य क्या है?

पौष एकादशी कब है? | Ekadashi (Gyaras) Kab Hai

साल 2022 December की पौष महीने की अगली एकादशी अर्थात ग्यारस की तिथि, समय और दिन कुछ इस प्रकार है।

अंग्रेजी तिथि 19 दिसंबर 2022
पंचांग महीना पौष महीना
दिन सोमवार
एकादशी का प्रकार सफला Ekadashi
समय 19 दिसंबर को 03:32 AM से 20 दिसंबर को 02:32 AM तक

आज एकादशी कब तक है 2022?

आज यानी 19 दिसंबर 2022 में सफला एकादशी 19 दिसंबर को सुबह 03:32 AM से 20 दिसंबर को सुबह 02:32 AM तक है।

पिछला एकादशी कब हुआ था?

साल 2022 में पिछले एकादशी की तिथि, समय और दिन कुछ इस प्रकार थी।

अंग्रेजी तिथि 03 दिसंबर 2022
पंचांग महीना अगहन महीना (मार्गशीर्ष)
दिन शनिवार
एकादशी का प्रकार मोक्षदा एकादशी (Mokshada)

मिलता जुलता लेख: पूर्णिमा कब है?

एकादशी मंत्र जाप

‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’

एकादशी पूजन सामग्री List

एकादशी पूजन में आमतौर पर जरूरत पड़ने वाले पूजन सामग्री कुछ इस प्रकार हैं।

क्रमांक पूजन सामग्री/सामान
1.श्री विष्णु जी का मूर्ति अथवा चित्र
2.पुष्प
3.नारियल
4.सुपाड़ी
5.फल
6.लौंग
7.धुप
8.दीप / दिया
9.घी
10.पंचा अमृत
11.अक्षत
12.तुलसी दल
13.चन्दन
14.मिठाई

साल 2022 में एकादशी(Ekadashi) की सूची Part 1

हिन्दू पंचांग के अनुसार साल 2022 में जनवरी से मई महीने के बिच पड़ने वाले सभी एकादशी की सूची दिन, समय और अंग्रेजी तिथि के अनुसार नीचे दी गयी है।

महीनाएकादशी अंग्रेजी तिथि | दिनसमय
पौषपौष एकादशी (वैकुण्ठ एकादशी)13 जनवरी 2022 | गुरुवार12 जनवरी (4:49 PM) – 13 जनवरी (07:32 PM)
माघषटतिला एकादशी28 जनवरी 2022 | शुक्रवार28 जनवरी (02:16 AM) – 28 जनवरी (11:35 PM)
माघजया एकादशी12 फ़रवरी 2022 | शनिवार11 फरवरी (01:52 PM) – 12 फरवरी (04:27 PM)
फाल्गुनविजया एकादशी26 फरवरी 2022 | शनिवार26 फरवरी (10:49 AM) – 27 फरवरी (08:12 AM)
फाल्गुनगौण विजय एकादशी / वैष्णव विजया एकादशी27 फरवरी 2022 | रविवार26 फरवरी (10:39 AM)- 27 फरवरी (08:12 AM)
फाल्गुनअम्बालिका एकादशी14 मार्च 2022 | सोमवार13 मार्च (10:21 AM) – 14 मार्च (12:05 PM)
चैत्रपापमोचनी एकादशी28 मार्च 2022 | सोमवार27 मार्च (06:04 PM) – 28 मार्च (04:15 PM)
चैत्रकामदा एकादशी12 अप्रैल 2022 | मंगलवार12 अप्रैल (04:30 AM) – 13 अप्रैल (05:02 AM)
चैत्रवैष्णव कामदा एकादशी13 अप्रैल 2022 | बुधवार12 अप्रैल (04:30 AM) – 13 अप्रैल (05:02 AM)
वैशाखवरूथीनि एकादशी26 अप्रैल 2022 | मंगलवार26 अप्रैल (01:37) – 27 अप्रैल (12:47)
वैशाखमोहिनी एकादशी12 मई 2022 | गुरुवार11 मई (07:31 PM) – 12 मई (06:51 PM)
ज्येष्ठअपरा एकादशी26 मई 2022 | गुरुवार25 मई (10:32 AM) – 26 मई (10:54 AM)
मिलता जुलता लेख: छठ पूजा कब है?

साल 2022 में एकादशी (Ekadashi) की सूची Part 2

हिन्दू पंचांग के अनुसार साल 2022 में जून से दिसंबर महीने के बिच पड़ने वाले सभी एकादशी की सूची दिन, समय और अंग्रेजी तिथि के अनुसार नीचे दी गयी है।

महीना अंग्रेजी तिथि दिन समय
ज्येष्ठनिर्जला एकादशी10 जून 2022 | शुक्रवार10 जून (07:25 AM) – 11 जून (05:45 AM)
ज्येष्ठगौना निर्जला एकादशी, वैष्णव निर्जला एकादशी11 जून 2022 | शनिवार10 जून (07:25 AM) – 11 जून (05:45 AM)
आषाढ़योगिनी एकादशी24 जून 2022 | शुक्रवार23 जून (09:41 PM) – 24 जून (11:12 PM)
आषाढ़देवश्यनी एकादशी10 जुलाई 2022 | रविवार09 जुलाई (04:39 PM) – 10 जुलाई (02:13 PM)
श्रावणकामिका एकादशी24 जुलाई 2022 | रविवार23 जुलाई (11:27 AM) – 24 जुलाई (01:45 PM)
श्रावणश्रवण पुत्रदा एकादशी8 अगस्त 2022 | सोमवार07 अगस्त (11:50 PM) – 08 अगस्त (09:00 PM)
भाद्रपदअजा एकादशी23 अगस्त 2022 | मंगलवार22 अगस्त (03:35 AM) – 23 अगस्त (06:06 AM)
भाद्रपदपरस्व एकादशी6 सितंबर 2022 | मंगलवार06 सितंबर (05:54 AM) – 07 सितंबर (03:04 AM)
भाद्रपदवैष्णव परस्व एकादशी7 सितंबर 2022 | बुधवार06 सितंबर (05:54 AM) – 07 सितंबर (03:04 AM)
अश्विनइंदिरा एकादशी21 सितंबर 2022 | बुधवार20 सितंबर (09:26 PM) – 21 सितंबर (11:34 PM)
अश्विनपापांकुशा एकादशी06 अक्टूबर 2022 | गुरुवार05 अक्टूबर (12:00 PM) – 06 अक्टूबर (09:40 AM)
कार्तिकरमा एकादशी21 अक्टूबर 2022 | शुक्रवार20 अक्टूबर (04:04 PM) – 21 अक्टूबर (05:22 PM)
कार्तिकदेवउत्थाना एकादशी04 नवंबर 2022 | शुक्रवार03 नवंबर (07:30 PM) – 04 नवंबर (06:08 PM)
मार्गशीर्ष (अगहन)उत्पन्न एकादशी20 नवंबर 2022 | रविवार19 नवंबर (10:29 AM) – 20 नवंबर (10:41 AM)
मार्गशीर्ष (अगहन)मोक्षदा एकादशी03 दिसंबर 2022 | शनिवार3 दिसंबर (05:39 AM) – 4 दिसंबर (05:34 AM)
मार्गशीर्ष (अगहन)वैष्णव मोक्षदा एकादशी, गुरुवायुर एकादशी04 दिसंबर 2022 | रविवार3 दिसंबर (05:39 AM) – 4 दिसंबर (05:34 AM)
पौषसफला Ekadashi19 दिसंबर 2022 | सोमवार19 दिसंबर (03:32 AM) – 20 दिसंबर (02:32 AM)

साल 2023 में एकादशी(Ekadashi) की सूची Part 1

साल 2023 में होने वाले एकादशी की तिथि, समय के साथ कुछ इस प्रकार है:

महीनाएकादशी अंग्रेजी तिथि | दिनसमय
पौषपौष एकादशी (वैकुण्ठ एकादशी)02 जनवरी 2023 | सोमवार01 जनवरी (07:11 PM) – 02 जनवरी (08:23 PM)
माघषटतिला एकादशी18 जनवरी 2023 | बुधवार17 जनवरी (06:05 PM) – 18 जनवरी (04:03 PM)
माघजया एकादशी01 फ़रवरी 2023 | बुधवार31 जनवरी (11:53 AM) – 01 फरवरी (02:01 P)
फाल्गुनविजया एकादशी16 फरवरी 2022 | गुरुवार16 फरवरी (05:32 AM) – 17 फरवरी (02:49 AM)
फाल्गुनगौण विजय एकादशी / वैष्णव विजया एकादशी17 फरवरी 2023 | शुक्रवार16 फरवरी (05:32 AM)- 17 फरवरी  (02:49 AM)
फाल्गुनअम्बालिका एकादशी03 मार्च 2023 | शुक्रवार02 मार्च (06:39 AM) – 03 मार्च (09:11 AM)
चैत्रपापमोचनी एकादशी18 मार्च 2023 | शनिवार17 मार्च (02:06 PM) – 18 मार्च (11:13 AM)
चैत्रकामदा एकादशी01 अप्रैल 2023 | शनिवार01 अप्रैल (01:58 AM) – 02 अप्रैल (04:19 AM)
चैत्रवैष्णव कामदा एकादशी02 अप्रैल 2023 | रविवार01 अप्रैल (01:58 AM) – 02 अप्रैल (04:19 AM)
वैशाखवरूथीनि एकादशी16 अप्रैल 2023 | रविवार15 अप्रैल (08:45 PM) – 16 अप्रैल (06:14 PM)
वैशाखमोहिनी एकादशी01 मई 2023 | सोमवार30 अप्रैल (08:28 PM) – 01 मई (10:09 PM)
ज्येष्ठअपरा एकादशी15 मई 2023 | सोमवार15 मई (02:46 AM) – 16 मई (01:03 AM)

एकादशी(Ekadashi) क्या है?

संस्कृत में ‘एकादश’ शब्द का अर्थ होता है ग्यारह (11), अर्थात हिन्दू पंचांग के अनुसार ग्यारहवां दिन। हमारी काल गणना दो पक्ष होते हैं, पहला शुक्ल पक्ष और दूसरा कृष्णा पक्ष। शुक्ल पक्ष का अर्थ होता है, जब चन्द्रमा पूर्णिमा की ओर जा रहा हो और कृष्ण पक्ष का अर्थ होता है जब चन्द्रमा पूर्णिमा से अमावश्या की ओर जा रहा हो।

शुक्ल पक्ष और कृष्णा पक्ष की यह काल गणना 15-15 दिनों की होती है। इनदोनो गणना में जो ग्यारहवां दिन होता है, वही एकादशी अथवा एकादश कहलाता है।

एकादशी कौन है?

हमारे ग्रंथो के द्वारा हमें इस बात की जानकारी होती है की, जितने भी देवी और देवता हैं। सबकी अपनी-अपनी पहचान और सबकी अपनी-अपनी एक रूप भी है। ठीक उसी प्रकार एकादशी का भी अपना एक रूप है।

एकादशी (Ekadashi) की एक कथा से हमें यह ज्ञात होता है की एक मोर नाम का शक्तिशाली राक्षस हुआ करता था। जिसने अपने प्रभाव से कई बार देवी-देवताओं को पराजित कर दिया था। हमेशा की तरह एक युद्ध के दौरान मोर राक्षस ने सभी देवी-देवताओं को पराजित कर दिया था।

मोर राक्षस से पराजित होने के बाद सभी देवी-देवता भगवान् श्री विष्णु के पास पहुंचे। जिसके पश्चात भगवन विष्णु ने इस अशूर के वध का इंतज़ाम किया। फिर भगवान् विष्णु ने स्वयं मोर राक्षस से युद्ध किया। भगवान् विष्णु से युद्ध में पराजित होता देख, मोर राक्षस युद्ध के मैदान से भाग खड़ा हुआ और इस तरह राक्षस ने अपनी जान बचा ली।

इसके बाद भगवान् विष्णु बद्रिका आश्रम चले गए और आराम करने लगे। इसी दौरान अपने मन में ईर्ष्या और बदले की भाव लिए मोर राक्षस भी भगवान् विष्णु का वध करने उनके पीछे-पीछे बद्रिका आश्रम पहुचें।

बद्रिका आश्रम में पहुंचते ही मोर राक्षस ने जैसे ही भगवन विष्णु को मारने के लिए तेयारी दिखाई, उसी पल भगवान् विष्णु के शरीर से उनकी स्वरूपा शक्ति अर्थात एक महिला के भेष में देवी प्रकट हुई।

देवी ने मोर राक्षस को देखकर युद्ध के लिए हुंकार भरी और एकादशी द्वारा हुंकार भरते ही मोर नाम का राक्षस मर गया। इसी के तुरंत बाद भगवान् विष्णु ने अपनी आँखें खोली और उस देवी को देखा। देवी ने अपना परिचय भगवान् विष्णु को दिया, जिससे भगवान् विष्णु काफी प्रसन्न हुए।

इसके पश्चात भगवान् विष्णु ने देवी से कहा की बताओ तुम्हे क्या चाहिए? इसका जवाब देते हुए एकादशी ने कहा की ‘हे भगवान्! मुझे आप ऐसी शक्ति दीजिये की मैं सारी तीर्थों में वास करूँ और जो लोग भी वहाँ आएं, मैं उनकी भक्ति का वर्धन करूँ और उनके पापों का नाश करूँ।’

चूँकि वो दिन ग्यारहवां (Gyaras) था, इसलिए भगवान् विष्णु ने उनका नाम एकादशी(Ekadashi) रखा और साथ ही उन्हें वरदान भी दिया।

एकादशी(Ekadashi) उपवास और विज्ञान

उपवास शब्द का आखिर अर्थ क्या है? दरअसल उप + वास में उप शब्द काअर्थ है पास और वास शब्द का अर्थ है रहना। अर्थात उपवास का अर्थ है भगवान् के नज़दीक रहना। या फिर ऐसे कहें की भगवान् के पास जाकर रहने का एक अच्छा तरीका है उपवास।

एकादशी (Ekadashi) उपवास करने का अर्थ यह नहीं है की इससे केवल भक्ति भावना जागृत होती है। बल्कि उपवास करने से हमारी सारी इन्द्रियाँ एक्टिव हो जाती है और साथ ही हमारा चंचल मन भी एकाग्रित हो जाता है। चलिए जानते हैं, एकादशी व्रत अर्थात उपवास रखने के वैज्ञानिक नजरिया क्या है?

दरअसल जीव विज्ञान के अनुसार हमारे शरीर में DNA होती है। जिसकी मौजूदगी का कोई अर्थ नहीं होता या कहें बेकार होता है, जिसके अंग्रेजी की भाषा में Junk DNA के नाम से जाना जाता है।

भले ही Junk DNA में किसी तरह की जानकारी नहीं होती। लेकिन समय के साथ ये Junk DNA खत्म होती जाती है और पूरी तरह से खत्म होने के पश्चात इंसान की मृत्यु हो जाती है। इसलिए Junk DNA एक प्रकार से इंसान की आयु निर्धारित करता है।

इसलिए Junk DNA को बचाने के लिए और इसकी टूटने की प्रक्रिया को धीमी करने के लिए प्रोटीन युक्त भोजन जैसे फल और सब्जियां काफी लाभकारी होती है। इसके अलावा उपवास रखना भी Junk DNA के टूटने की प्रक्रिया को काफी कम कर देती है।

1 साल में कितनी एकादशी होती है?

1 साल में कूल 12 महीने होते हैं और प्रत्येकल महीने 2 एकादशी पड़ती है। तब इसके अनुसार एक साल में कूल 24 एकादशी होती है। लेकिन कभी-कभी एक ही तिथि दो बार पड़ने से साल भर में एकादशी की तिथि बढ़ सकती है। जिससे 1 साल में एकादशी की संख्या 14 से 15 भी हो सकती है।

सबसे बड़ी एकादशी कौन सी है?

एकादशियों में भी सबसे बड़ी एकादशी निर्जला एकादशी होती है। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ महीने की पहली पख में पड़ने वाली निर्जला एकादशी को सबसे बड़ी एकादशी मणि जाती है।

एकादशी पर किसकी पूजा करनी चाहिए?

आपकी जानकारी के लिए बता दूँ, एकादशी में भगवान् विष्णु की पूजा की जाती है। इसके अलावा एकादशी के दिन भगवान् विष्णु की पूजा के दौरान तुलसी का चढ़ावा चढ़ाना अन्तंत शुभकारी माना जाता है।

एकादशी के दिन क्या न करे?

एकादशी के दिन किये गए पूजा-पाठ का काफी महत्व होता है। लेकिन इस दिन पूजा-पाठ करने के साथ ही कुछ चीज़ें ऐसी होती है, जिसे करने से हमें परहेज़ करनी चाहिए।

  • इस दिन फूल और वृक्ष के पत्ते तोड़ने से बचें और एकादशी के एक दिन पहले ही तुलसी पत्ते को तोड़कर रख लें।
  • इस दिन भूलकर भी चावल का सेवन न करें।
  • एकादशी के एक दिन पूर्व ही संध्या में अपने घर पर साफ़ सफाई कर लें। एकादशी के दिन झाड़ू लगाने से बचें ऐसा करने से घर में ,मौजूद कई छोटे किट मर जाते हैं। जिससे हम पाप के भागिदार बनते हैं।
  • इस दिन मास-मदिरा, प्याज़ और लहसुन का सेवन भूलकर भी नहीं करें। इसके अलावा इस दिन जौ और मसूर की दाल का भी सेवन वर्जित होता है।
  • एकादशी पूजा भगवान् विष्णु को मीठा पान अर्पित किया जाता है, इसलिए इस दिन मीठा पान खाने से परहेज़ करें।

अंतिम शब्द

इस लेख में आपने जाना की साल 2022 में एकादशी कब है (Ekadshi Kab hai)? साथ ही आपने एकादशी व्रत का महत्व और विज्ञान से इसके जुड़ाव को भी जाना (Satta King)। इस लेख से सम्बंधित किसी प्रकार की कोई समस्या, सुझाव, शिकायत या सवाल आपके मन में हो तब नीचे कमेंट करके हमें जरुर बतलायें, धन्यवाद।

FAQs

Q: इस महीने की एकादशी(Ekadashi) कब की है?

उत्तर: पौष महीने की सफला एकादशी, 19 दिसंबर 2022 को है।

Q: आज एकादशी है या नहीं 2022?

उत्तर: आज दिनांक 19 दिसंबर 2022 को सफला एकादशी है।

Leave a Comment