शेरशाह: कैप्टन विक्रम बत्रा की जीवनी, Movie, LOC Kargil, Family, Biography

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Last Updated on August 5, 2021 by WikiHindi

कैप्टन विक्रम बत्रा ने 24 वर्ष की उम्र में भारत के लिए साहस और बलिदान का एक ऐसा उदाहरण स्थापित किया जिसे अभी तक भुलाया नहीं जा सका है और कभी भुलाया भी नही जाएगा। 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने सर्वोच्च आदेश का नेतृत्व प्रदर्शित किया और राष्ट्र के लिए खुद का बलिदान दिया।

शेरशाह कैप्टन विक्रम बत्रा की जीवनी, Movie, Age, Family, Biography
कैप्टन विक्रम बत्रा अपने बटालियन के साथ

कैप्टन विक्रम बत्रा: जन्म, परिवार और शिक्षा

कैप्टन विक्रम बत्रा का जन्म 9 दिसंबर 1974 को पालम्पुर हिमाचल प्रदेश में गिरधारी लाल बत्रा और कमल बत्रा के घर हुआ था। इनके पिता गिरधारी लाल बत्रा एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल थे, जब की इनकी माता एक विद्यालय में शिक्षक थी। कैप्टन विक्रम बत्रा की पढ़ाई पालम्पुर में डी.ए.वी पब्लिक स्कूल में हुई, फिर इन्होनें आगे की माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए केंद्रीय विद्यालय में प्रवेश लिया। इन्होनें वर्ष 1990 में, अपने भाई के साथ अखिल भारतीय के.वी.एस नागरिकों के टेबल टेनिस में स्कूल का प्रतिनिधित्व भी किया था।

कैप्टन विक्रम बत्रा कराटे में ग्रीन बेल्ट थे और मनाली में रास्ट्रीय स्तर पर खेल में भाग लिया था। ये डी.ए.वी कॉलेज से बी एस सी में चिकित्सा विज्ञान में स्नातक थे। अपने कॉलेज के दिनो में, कैप्टन विक्रम बत्रा एन.एस.सी, एयर विंग में शामिल हो गए। कैप्टन विक्रम बत्रा को अपनी एन एस सी एयर विंग ईकाई के साथ पिंजौर एयरफील्ड और फ़्लाइंग क्लब में 40 दिनो के प्रशिक्षण के लिए चुना गया था। कैप्टन विक्रम बत्रा ने ‘C’ सर्टीफिकेट के लिए क्वालिफाइ किया और एन.सी.सी में कैप्टन विक्रम बत्रा का रैंक दिया गया।

1994 में इन्होंने एन सी सी कैडेट के रूप में गणतंत्र दिवस परेड में भाग लिया और अगले दिन अपने माता पिता को भारतीय सेना में शामिल होने की अपनी इच्छा जताई। 1995 में अपने कॉलेज के दिनों के दौरान, उन्हें हांगकांग में मुख्यालय वाली शिपिंग कंपनी के साथ मर्चेंट नेवी के लिए चुना गया था, लेकिन इन्होंने अपना इरादा बदल दिया।

1995 में डी ए वी कॉलेज, चंडीगढ़ से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने अंग्रेजी में एम ए करने के लिए पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में दाखिला लिया। इन्होंने कंबाइंड डिफेन्स सर्विसेज (CDS) परीक्षा की तैयारी के लिए विषय को चुना इन्होंने शाम की कक्षाँए ली और दिन के समय चंडीगढ़ में एक ट्रैवल एजेंसी की शाखा प्रबंधक के रूप में काम किया। 1996 में इन्होने CDS की परीक्षा दी और इलाहाबाद में सेवा चयन बोर्ड (SSB) द्वारा चयन हुआ, और यह चयनित होने वाले शिर्ष 35 उम्मीदवारों में से एक थे।

भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) में शामिल होने के लिए इन्होंने अपने कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोर दी।

कैप्टन विक्रम बत्रा जीवन सारांश

नामविक्रम बत्रा
पूरा नामकैप्टेन विक्रम बत्रा
निक नाम (Nick Name)शेरशाह
पेशा (Profession)सेना अधिकारी
ऊंचाई (Height)5 फ़ीट 8 इंच
जन्म तिथि (Birthday)9 सितम्बर 1974
जन्म स्थान (Birthplace)पालमपुर, हिमाचल प्रदेश
वीरगति की प्राप्ति (Martyred)7 जुलाई 1999
उम्र, वीरगति के समय24 वर्ष
वीरगति स्थान (Place of Martyred)Point 4875, कारगिल, जम्मू और कश्मीर, भारत
गृहनगर (Hometown) पालमपुर, हिमाचल प्रदेश
राशि (Zodiac)कन्या राशि
धर्म (Religion)हिन्दू (Hinduism)
राष्ट्रीयता (Nationality)भारतीय
व्यक्तिगत जीवन (Personal Life)
माता (Mother)कमल कान्ता बत्रा (शिक्षक)
पिता (Father)गिरधारी लाल बत्रा (प्रिंसिपल)
भाई (Brother)विशाल
बहन (Sister)सीमा और नूतन
वैवाहिक जीवनअवैवाहिक
प्रेमिका (Girl Friend)डिंपल चीमा
शिक्षा (Education)
विद्यालय (School)1. D.A.V. School Palampur(कक्षा 8वी तक)
2. केंद्रीय विद्यालय पालमपुर (12विं तक)
महाविद्यालय (College)1. D.A.V. College Chandigarh
2. पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़
शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualification)B.Sc Medical Science
M.A in English (अधूरी)
मिलिट्री सेवा (Military Service)
सेवाभारतीय सेना
सेवा वर्ष1996-1999
इकाई (Unit)13 JAK RIF
कीर्तिमान (Record)
युद्ध/ लड़ाई1. पॉइंट 4875.
2. पॉइंट 5140.
3. ऑपरेशन विजय,
4. कारगिल युद्ध
सम्मान (Honoured)मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित
कैप्टन विक्रम बत्रा जीवन सारांश

कैप्टन विक्रम बत्रा: सैन्य करियर

जून 1996 में, कैप्टन विक्रम बत्रा मानेकशॉ बटालियन में IMA में शामिल हो गए। 6 दिसंबर 1997 को, इन्होंने अपने 19 महीनो की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, IMA से स्नातक किया उसके बाद उन्हें 13वीं बटालियन, जम्मू और कश्मीर रायफल्स में लेफ्टिनेंट के रूप में नियुक्त किया
गया, एक महीने तक चलने वाले प्रशिक्षण के बाद, वह बारामूला जिले, जम्मू और कश्मीर के सोपोर में तैनात किये गए। आपको बता दें इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण आतंकवादी गतिविधियां हुआ करती थी।

मार्च 1998 में, उन्हें यंग ऑफिसर्स कोर्स पूरा करने के लिए इन्फैन्टी स्कूल में पाँच महीने के लिए म्हॉव मध्यप्रदेश भेजा गया और ट्रेनिंग पूरा होने पर, इन्हें अल्फा ग्रेडिंग से सम्मानित किया गया। इसके पश्चात इन्हे जम्मू-कश्मीर में अपनी बटालियन में फिर से शामिल किया गया। जनवरी 1999 में, इन्हें बेलगाम, कर्नाटक में 2 महिनों के कमांडो कोर्स को पूरा करने के लिए भेजा गया और इस ट्रेनिंग के पूरा होने पर, इन्हे सर्वोच्च ग्रेडिंग से सम्मानित किया गया।

कारगिल युद्ध के दौरान अपनी शहादत से पहले, इन्होंने 1999 में होली के त्यौहार के दौरान सेना से छुट्टी लेकर अपने घर का दौरा किया था। जब भी वह अपने घर जाते थे, वे ज्यादातर नियुगल कैफे जाते थे। इस बार भी इन्होंने कैफे का दौरा किया और अपने सबसे अच्छे दोस्त और मंगेतर डिम्पल चिमा से मिले।

डिम्पल ने विक्रम बत्रा से युद्ध में सावधान रहने को कहा, जिसमें बत्रा ने उत्तर दिया, ‘मै या तो लहराते तिरंगे के पीछे आऊँगा, या तिरंगे में लिपटा हुआ आऊँगा, पर मैं आऊँगा जरूर’ अपनी छुट्टियाँ ख़त्म होने के बाद, इन्होंने सोपोर में अपनी बटालियन को फिर से ज्वॉइन किया उनकी बटालियन, 13 JAK RIF को शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश के लिए आगे बढ़ने का आदेश मिला। बटालियन ने 8 माउन्टेन डिवीजन के 192 माउन्टेन बिग्रेड के तहत काश्मीर में अपने आतंकवाद रोधी कार्य को पूरा किया हालांकि, 5 जून को बटालियन के आदेशों को बदल दिया गया और इन्हे द्राश जम्मू-कश्मीर में स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया।

कैप्टेन विक्रम बत्रा: कारगिल युद्ध

द्रास सेक्टर में, पाक सेना ने मजबूत किलेबंदी की, जो स्वचालित हथियारों से लैस थें, 20 जून 1999 को, कमांडर डेल्टा कंपनी के कैप्टेन विक्रम बत्रा को ऑप्रेशन ‘विजय‘ के दौरान पॉइंट 5140 पर हमला करने का काम सौपा गया था। कैप्टेन विक्रम बत्रा अपनी कम्पनी के साथ, पूर्व दिशा की ओर से बिना शत्रु के भनक लगे हुए उसकी मारक दुरी के भीतर उस क्षेत्र के अन्दर तक पहुंच गए।

कैप्टेन विक्रम बत्रा ने अपने दस्ते को पुनर्गठित किया और उन्हे दुश्मन के ठिकानो पर सीधे हमला करने के लिए प्रेरित किया। कैप्टेन विक्रम बत्रा सबसे आगे अपने दस्ते का नेतृत्व कर रहे थे और इन्होंने बड़ी निडरता से शत्रु पर धावा बोल दिया और आमने-सामने की लड़ाई में 4 दुश्मनो को मार गिराया। यह क्षेत्र बहुत दुर्गम भरा था लेकिन इसके बावजूद कैप्टेन बत्रा ने अपने साथियों के साथ इस चोटि को अपने कब्जे में ले लिया और साथ ही कैप्टेन बत्रा ने इस चोटि से रेडिओ के जरिए अपना विजयी उद्योश किया।

7 जुलाई 1999 को, पॉइंट 4875 चोटि को कब्जे में लेने के लिए अभियान शुरू किया गया था और इस अभियान के लिए भी कैप्टेन विक्रम बत्रा और इनकी टुकड़ी को जिम्मेवारी सौपी गई। यह एक ऐसी मुश्किलों से भरी जगह थी।

जहां दोनो ओर खड़ी ढलान थी और इसी एकमात्र रास्ते की शत्रु ने भारी संख्या में नाकाबन्दी की हुई थी। इस कार्य को जल्दी पूरा करने के लिए कैप्टेन विक्रम बत्रा एक संकीर्ण पठार के पास से शत्रु ठिकानों पर आक्रमण करने का निर्णय लिया। इसका नेतृत्व करते हुए आमने-सामने की भीषण लड़ाई में कैप्टेन विक्रम बत्रा ने 5 शत्रु सैनिकों को पॉइंट ब्लैक रेंज में मार गिराया।

इस लड़ाई के दौरान कैप्टेन बत्रा को काफी गम्भीर जख्म लग गए इतने जख्म लगने के बाबजूद वो पीछे मुड़ने के बजाय रेंग्ते हुए शत्रु की ओर
बढे ग्रेनेड फेंके और वहां से भी शत्रुओ का सफाया किया। उन्हाँने अपने साथी जवानों को एकत्र किया और सबसे आगे रहकर आक्रमण के लिए प्रेरित किया और लगभग एक असम्भव कार्य को पूरा कर दिखाया। उन्होंने इस प्रक्रिया के दौरान अपनी जान की परवाह किये बिना इस अभियान को दुशमनो की भारी गोलीबारी में भी पूरा किया।

परंतु भारी जख्मों के कारण कैप्टेन विक्रम बत्रा वीरगति को प्राप्त हुए।

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कैप्टेन विक्रम बत्रा: लिगेसी

  • पॉइंट 4875 के एतिहासिक कब्जे के कारण पहाड़ को उनके सम्मान में बत्रा टॉप नाम दिया गया।
  • जबलपुर क्षेत्र में एक आवासीय क्षेत्र को विक्रम बत्रा एन्क्लेव कहा जाता है।
  • सेवा चयन केंद्र इलाहाबाद के एक हॉल का नाम “विक्रम बत्रा ब्लौक’ है।
  • आई एम ए में संयुक्त कैडेट मेस का नाम ‘विक्रम बत्रा मेस है।
  • चंडीगढ़ के डी.ए.वी कॉलेज में बत्रा सहित युद्ध के दिग्गजों के लिए एक स्मारक है।
  • दिसंबर 2019 में दिल्‍ली के मुकरबा चौक और इसके फ़्लाईओवर का नाम बदलकर शहीद कैप्टेन विक्रम बत्रा चौक कर दिया गया।

कैप्टन विक्रम बत्रा: सम्मान

वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान वीरता के अपने विशिष्ट कार्यों के लिए कैप्टन विक्रम बत्रा को भारत सरकार द्वारा 15 अगस्त 1999 को मरणोपरांत परम्वीर चक्र से सम्मानित किया गया।

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कैप्टेन विक्रम बत्रा: फिल्‍म

2003 में बॉलीवुड फिल्म LOC कारगिल रिलीज हूई थी और यह फिल्म पूरे कारगिल संघर्ष पर आधारित थी। अभिषेक बच्चन ने फिल्म में कैप्टन विक्रम बत्रा की भूमिका निभाया था।

2021 की फिल्म शेरसाह जो ।2 अगस्त को रिलीज़ होगी और सिधार्थ मल्होत्रा ने विष्णुवर्धन द्वारा निर्देशित और धर्मा प्रोडक्शन और पेन इंडिया लिमिटेड द्वारा निर्मित एक बियोपिक में कैप्टन विक्रम बत्रा की भूमिका निभाई।

कैप्टेन विक्रम बत्रा आधारित शेरशाह फिल्म का ट्रेलर

Courtesy: Amazon Prime Official YouTube Channel

अंतिम शब्द

इस लेख के माध्यम से आपने देश के लिए वीरगति को प्राप्त हुए और परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टेन विक्रम बत्रा के बारे में बढ़ा और गर्वान्वित महसूस किया। इस लेख से जुडी किसी प्रकार की कोई भी सवाल आपके मन में हो तब आप निचे कमेंट कर हमें अवश्य बताएं, धन्यवाद।

FAQs

Q: शेरशाह फिल्म किसकी बायोपिक है?

Ans: मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टेन विक्रम बत्रा की जीवनी पर आधारित है।

Q: शेरशाह फिल्म की रिलीज़ डेट क्या है?

Ans: 12 अगस्त 2021

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